राम मंदिर चंदा चोरी मामला क्या है?
- मीडिया रिपोर्ट्स और कुछ राजनीतिक दलों ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दान-पात्रों से ₹200 करोड़ से अधिक की राशि के गबन या हेराफेरी का आरोप लगाया गया है।
- जांच एजेंसियों ने अभी तक अंतिम आंकड़े की पुष्टि नहीं की गई है।
- यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है और लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में एक SIT का गठन किया है।
चढावा चोरी केस में पुलिस और SIT की जांच में क्या हुआ
- शुरुआती जांच में मंदिर प्रबंधन से जुड़े कुछ कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका सामने आई है।
- पुलिस द्वारा कई कर्मचारियों के घरों से लाखों रुपये की नकदी बरामद की जा चुकी है और कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है।
- जांच में यह भी सामने आया है कि जो कर्मचारी दान की राशि इकट्ठा करने और जमा करने के काम में लगे थे, उन्होंने मंदिर के वॉल्ट के पास जो सीसीटीवी कैमरे लगाए थे, वे ठीक से काम नहीं कर रहे थे। इससे मंदिर प्रबंधन के वरिष्ठ सदस्यों की मिलीभगत की ओर भी इशारा मिलता है।
राम मंदिर पहुंची SIT टीम, 100 से अधिक कर्मचारियों से पूछताछ
- श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दानराशि गबन मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अब अपनी पड़ताल का दायरा बढ़ा दिया है।
- कथित चढ़ावा चोरी या गबन की जांच के साथ-साथ टीम ने प्राण प्रतिष्ठा (22 जनवरी 2024) के बाद मंदिर में हुई नियुक्तियों, प्रशासनिक निर्णयों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा शुरू कर दी है।
- बीते गुरुवार को चौथे दिन SIT की टीम सुबह 8.30 बजे राम मंदिर पहुंची। बताया जाता है कि वहां चढ़ावा राशि की गिनती और उससे जुड़े कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर मंदिर ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र से पूछताछ हुई।
- SIT आगे रेडियो प्रचार निरीक्षक अर्जुन सिंह और राम जन्मभूमि चौकी प्रभारी से भी पूछताछ कर सकती है। अर्जुन सिंह करीब 20 साल से राम मंदिर में ड्यूटी कर रहे हैं। वह VIP दर्शन की व्यवस्थाओं से जुड़े रहे हैं।
- SIT ने 3 दिनों में अब तक करीब 100 कर्मचारियों से पूछताछ की है।
- विशेष जांच टीम बीते मंदिर ट्रस्ट और वहां के प्रशासन से जुड़े 11 महीने के दस्तावेज खंगाल रही है।
